मैं , मेरी पलटन और मसूरी का हनीमून इन


मैं,मेरी पलटन और मसूरी का हनीमून इन

जितेंद्र सिंह | अलीगढ़

र मे रहकर काम करते हुए एक लम्बा अरसा हो चुका था। पिछले साल मार्च में एका एक लॉकडाउन की घोषणा के बाद से मेरे जैसे बहुत से लोग धर में कैद होकर उक्ता चुके थे । और अपने दफतर के खुलने का इंतजार कर रहे थे। इस दौरान बहुत कुछ बदल चुका था। कुछ संस्थाऐं भी अपने कामकाज पर लौटने लगी थी। बंद भारत अब खुलने लगा था। लग रहा था कि एक बडा खतरा टल चुका है। और करोना नाम का प्राणी अपना बोरिया बिस्तरा बांधकर वापिस चाईना चला गया है। लेकिन वो तो एक बार फिर पहले से ज्यादा भयानक रूप लेकर वापिस आ धमका था। कौन जानता था कि इस बार यह प्रलयकारी दानव युवाओं पर ज्यादा भारी पडने वाला है। इसके बाद की स्थिति के बारे में सोचने से भी डर लगता है हालांकि मैने अपने पिछले लेख में इसका जिक्र किया है। इस स्थिति से गुजरने के बाद मानसिक रूप से इतना थक चुके थे कि धर की कैद को तोड कर खुले आसमान में उडना चाहते थे।

एक दिन यूं ही आफिस का काम जल्दी निपटा कर शमां और प्रशांत से मिलने का मन बना। जैसे ही गुनगुन को पता चला तो वो भी हमेशा की तरह बिन बुलाए मेरे साथ हो ली। उनका घर थोडी ही दूरी पर हैं। शमां नोएडा की एक नामी कम्पनी में प्राडक्ट मैनेजर है और रिष्ते में गुनगुन की मौसी भी। प्रशांत अमेजन में सॉफटवेयर डेवेलपर है। दोनो लॉक्डाउन के बाद से अलीगढ में ही थे। यह दोनों भी मेरी तरह ट्रेवलिंग के शौकीन है। हमारी ज्यादा तर बातें हमारे पिछले टूर के बारे में ही होती है। इस बार भी यही हुआ और बातों बातों में  शमां ने मेरे मन की बात कह दी। फिर क्या था हमारे अगले टूर के लिए डैस्टीनेशन. पर रोज बातें होने लगीं ।और मसूरी, नैनीताल व डलहौजी के नाम तय हुए। 

हमारे इस क्राईम में हमारा एक और पार्टनर है अमित उसे जैसे ही भनक लगी वो आगरा से रोजाना फोन पर अपने सुझाव देने लगा। अमित मेरे और प्रशांत का कॉमन साला है और आईआईटी बीएचयू से पीएचडी कर रहा है। इस बार सीमा भी हमारे साथ जाने के लिए तैयार हो गई । सीमा , अमित की धर्मपत्नी है जो फिलहाल बैंक ऑफ बडोदा की सुल्तानपुर में मैनेजर है लेकिन आजकल आगरा में ही अपनी नई पोस्टिंग का इंतजार कर रही थी। और जब हमारे फौजी भाई यानी हमारे पापा इन लॉ को पता चला तो उन्होने दित्या का मुण्डन करवाने का सुझाव दे दिया वैसे भी वो छह महीने की हो रही थी और इस टूर पर उसकी दोनों बुआऐं भी जाने वाली थी और वो भी हरिद्वार।आखिरकार मसूरी व हरिद्वार जाना तय हुआ। 

हम सभी ने अपनी आरटीपीसीआर रिपोर्ट करवाई और उत्तराखण्ड की वेबसाईट पर रजिस्ट्रेशन 

A view of Library Chowk at Mussorie, Uttarakhand
The Library Chowk at Mussorrie
करा कर अलीगढ से नौएडा के लिए, गुरूवार शाम को निकल पडे। ये जून के दूसरे हफते की बात है। अमित और सीमा आगरा से आ गए। अगले दिन हम प्रषांत के हाईड पार्क वाले घर से सुबह साढे पांच बजे दो गाडियों में अपने अपने बच्चों गुनगुन , वेदिका, गोकू और दित्या के साथ निकल पडे।


A sunset view from The Mall Road, Mussorie, Uttarakhand
A View of Mussorrie Hills from Mall Road

दिल्ली एनसीआर में हुए प्रमुख बदलावों में से एक है मेरठ एक्सपेस वे जो दैनिक यात्रियों के लिए किसी वरदान से कम नही। नौएडा से उस पर चढने के बाद पता ही नही चला की कब मेरठ निकल गया। वरना मुझे याद है लाल कुंआं से नौएडा या दिल्ली आना कितना बडा सरदर्द होता था । आज उसी हाईवे के बीचो बीच मेरठ एक्सप्रेसवे बनाया गया है जो अविष्वसनीय सा लगता है। खैर मेरठ से हरिद्वार का रास्ता भी बेहद आरामदायक था। हमने मसूरी तक की यात्रा मात्र साढे तीन घंटें मे पूरी कर ली। हां रास्ते में हमारा डेढ घंटा रूढकी के पास, उत्तराखण्ड के बॉर्डर की पुलिस चैकपोस्ट पर पंजीकरण करवाने में जरूर खराब हुआ। वो तो अच्छा था कि हम आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट अपने साथ लाए थे वरना हमें पूरे परिवार के साथ लाईन में लग कर टेस्ट करवाना पडता जिसके लिए सुबह से ही लम्बी लाईनें लगी थी। खैर उत्तराखण्ड आने वालों की भीड से हमें एक बात की खुषी तो मिली कि खाली हम ही पागल नही हैं जिन्हें इस महामारी के समय भी घूमने की पडी थी।


A scenic view between Dhanaulti & Surkanda Devi Temple, Uttarakhand
View from Mussorrie 

हमने समय से अपने होटल पहुच कर चेक इन किया और थोडा आराम किया। होटल था हनीमून इन, सुनने में थोडा अजीब लगा था कि हम पूरी पलटन के साथ हनीमून इन में क्या कर रहे हैं। लेकिन थोडी ही देर बाद वेदिका और गोकू ने जो होटल की शांती में आग लगाई उसके बाद सभी गेस्ट खासकर की हनीमूनर्स या नव विवाहित जोडे हमारी ओर इसी नजर से देख रहे थे।

A view of a lane with a lamp post, british articheture, The Mall, Mussorie, Uttarakhand
An evening view of the Mall Road , Hotel Honeymoon Inn

शांम हो चली थी और हमने अपने होटल के कमरे से निकलकर मॉल रोड की ओर रूख किया। मै अगर अपनी बात करूं तो मै मसूरी पहले भी कई बार आ चुका था। लेकिन इस बार मसूरी अपने शबाब पर था। हमारे पहुचते ही मौसम की पहली बारिशकी दस्तक ने इसे और भी ज्यादा खुशगवार बना दिया। मैने कई बार सुना था कि मसूरी को लोग पहाडों की रानी कहते है। लेकिन जिसने हिमाचल के पहाडों  को देखा हो उसके लिए डलहौजी या किन्नौर वैली की खूबसूरती के आगे मसूरी को यह टाईटल देना मजाक लगेगा। लेकिन मसूरी ने मेरी इस गलतफहमी को जल्द ही दूर कर दिया ।पहली बार मैने इस छोटे से हिल स्टेशन में एक अजीब सी खामोशी  को महसूस किया। शायद ये लॉकडाउन का असर था । पहली बार इस शहर में सैलानी बहुत कम थे। ना गाडियों की भीड ना हॉर्न की आवाज। वरना किसी भी सीजन में यहां सिर्फ भीड और गाडियों का जाम ही मिलता है। मेरी समझ मे मसूरी, नैनीताल और शिमला को सैलानियों की भीड के जमघट ने बार्बाद कर दिया है। बहुत से लोग तो इस डर से वहां जाने से कतराते हैं। हर सप्ताहंत में दिल्ली वालों की मनपसंद डेस्टिनन बनने की वजह से यहां पर्यटन उद्योग को तो निष्चित रूप से फायदा मिला है लेकिन सैलानियों की बेहिसाब भीड ने यहां के जीवन और व्यवस्था को प्रभावित किया है।

Mall Road on a busy day in summers 2021,

इसे छोढिए जनाब आगे सुनिए। एक तरफ सूरज देवता के ढलने की तैयारी और दूसरी तरफ धुंध की हल्की परत ठण्ड का अहसास करा रही थी। ऐसे में मॉल रोड पर सैर करने का एक अलग ही मजा था। जहां देखो हर तरफ एक खूबसूरत नजारा । हरे भरे पेडों से लदे पहाड और चिडियों का शोर। मैं सोच रहा था कि का मेरा घर यहीं होता तो कितना मजा आता ।तभी अचानक मेरी नजर एक शिलालेख पर पडी जहां एक पुराना प्रोजेक्टर भी रखा गया है जिस पर अंकित था मसूरी में सिनेमा का आगमन, मैने सुना था कि हर षहर की अपनी एक संस्कृति होती है। उसकी एक झलक ने मुझे वशिभूत कर दिया। यहां के लोगों ने अपनी इस उपलब्द्वि को संजो कर रखा है जिसे देख कर बहुत अच्छा लगा। 

The Entry of First Cinema in Mussorrie
अच्छा मजे की बात ये रही कि गुनगुन मा और सीमा को इससे कोई लेना देना नही था। उन्हें तो बस अपने फोटो खिंचवाने में मजा आ रहा था। गुनगुन तो फोटो खिंचवाने का एक भी मौका नहीं छोडती।वेदिका अभी सिर्फ छह साल की और गुनगुन से बिल्कुल अलग। शांत और सहज। और गुनगुन पूरी तुफान मेल। यहां शाम का कर्फयू अभी भी जारी था सो स्थानीय दुकानें बंद थीं कुछ एक को छोडकर। हम ज्यादा देर तक इन नजारों को देख पाते इससे पहले पुलिस की गाडी अचानक से हमारे सामने आकर रूकी और उन्होनें पहले तो हमें मास्क ना पहनने का कारण पूछा और फिर अपने होटल वापिस जाने को कहा। हमारे पास इस हुक्म की नाफरमानी की कोइ वजह नही थी।

Hotel Honeymoon Inn, Mussorie a view

Gungun in Selfie Mode

अब हम एक बार फिर होटल के कमरे में कैद होने को मजबूर हो गए । सौभाग्यवष होटल के ऐंट्रंस पर एक बालकनी जैसी खुली जगह थी जहां आप बैठ कर चाय की चुस्की के साथ प्रकृति के नजारे देख सकते थे । हम सब वहां काफी देर तक रूके और ढेर सारी बातें की। मजा आ गया। ठण्ड बढने लगी तो हम वापिस अपने कमरों में लौट गए। एक बात तो जरूर कहूंगा कि एसी परिस्थिति में भी इस होटल के खाने के स्वाद में और वैराइटी में कोई कमी नही थी।

वैसे तो मसूरी में बहुत कुछ नही है घूमने के लिए सिवाय मॉल रोड के। लेकिन बहुत कम लोग लैण्डौर के बारे में जानते हैं जो मसूरी से ठीक उपर है और एक ब्रिटि कैण्टोनमेंट हैं जहां आज भी गुजरे जमाने की यादें ताजा है। और हां ये जगह ट्रैकिंग के लिए बेस्ट है। अगर अपको सोलो  टैवलिंग पसंद है तो ये आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेन है। जहां आप समय बिता सकते हैं । मैं और प्रषांत यहां आने से पहले एक ब्लॉग देख कर आए थे जिसमें लैण्डौर का जिक्र था। तभी से हमने मन बना लिया था कि हम वहां जरूर जाऐंगे। लेकिन मेरे रीर ने जवाब दे दिया । और उपर से मेरी पलटन। अगले दिन हमने तय किया कि हम किराये की गाडी से आस पास घूमने जायेंगे। तो हम नाष्ता कर के धनौल्टी और सुरकण्डा देवी के लिए निकल पडे। लॉकडाउन की वजह से वहां पर सब कुछ बंद था। वैसे भी वहां ले देकर सिर्फ एक ईको पार्क ही तो है ओर वो भी उस दिन बंद था। लेकिन यहां तक आने का रास्ता बहुत रोमांटिक है। मसूरी से धनौल्टी के रास्ते में एसे खुबसूरत नजारे आते है कि आप खुद को फोटो खींचने से रोक नही पायेंगे।  


A view of Himalayas from Dhanaulti, Uttarakhand
My daughter Bhavya (Gungun)

A view of Himalayan mountains from Uttarakhand

A scenic viewnear Mossourie, Uttarakhand
A Scenic View between Dhanaulty & Mussorrie

खैर हम सुरकण्डा देवी के दर्षन के लिए आगे बढे। मंदिर की उंचाई देख कर पहली नजर मे तो मेरे हो उड गए थे। और मैने मन नही मन माता रानी से माफी मांग ली थी की मैं नही आ पाउंगा। लेकिन फिर हिम्मत कर सब के साथ चल दिया। सुरकण्डा देवी की चढाई वैसे तो बहुत ज्यादा नही है लेंकिन थोडी मुष्किल जरूर है। और रास्ता भी बहुत घुमावदार व खडी चढाई। पगडंडियां व क्च्चा टूटा फूटा पथरीला रास्ता । मुझे सारे देवी देवता याद आ गए ।

Exterior View of Surkanda Devi Temple in Uttarakhand
View of the Gateway to Surkanda Devi Temple on the Road


Way to Surkanda Devi Temple
Way to The Surkanda Devi Shrine

Mata Surkanda Devi Trek, Dhanaulti, Uttarakhand
Way to The Shrine
view from surkanda devi marg, Uttarakhand
A View from the Surkanda Tevi Temple

On the way to the Temple

आखिरकार मै हांफता हुआ उपर पहुंच ही गया। लंकिन यहां आकर मेरी सारी थकान दूर हो गई जब मैने वहां सें दूर दूर तक गगनचुम्बी पहाडों को देखा मन खुश हो गया। अगर मै वाकई वहां नहीं गया होता तो कितना कुछ मिस कर देता । सुरकण्डा देवी मंदिर की यहां अत्तराखण्ड में बहुत मन्यता है । ये एक प्रचीन सिद्व पीठ है। यहां लोगों का तांता लगा रहता है जबकि इन इिनों में करोना के डर से लोग घर से निकल नही रहे थे लेकिन फिर भी यहां अच्छी खासी भीड थी । 


Surkanda Devi Temple, Pauri Garhwal, Uttarakhand
View of the Main Temple

Surkanda Devi Temple, Dhanaulti, Pauri Garhwal

Close view of Surkanda Devi Temple, Pauri Garhwal, Uttarakhand
Wide view of Surkanda Devi Temple in Pauri Garhwal, Uttarakhand
Surkanda Devi Temple, Dhanaulti

Surkanda Devi Temple, Dhanaulti
Amit, Seema and Ditya at Temple

Vedika

A random click by Bhavya Chauhan with Dr Jitendra SIngh in frame from Surkanda Devi Temple, Uttarakhand

Dr. Jitendra Singh with his little family at Surkanda Devi Temple premises, Uttarakhand
Me and My Palton

A Scenic View From Surkanda Tevi Temple in Dhanaulty, Uttrakhand

हां पर यात्रियों के लिए सरकार द्वारा कोई खास इंतजाम नही किये गये है। मै एसा इसलिये भी कह रहा हूं क्योंकि मै जब एक तरफ माता वैष्णों देवी की यात्रा से अगर इसकी तुलना करता हू तो वहां यात्रियों के आराम के लिए हर मुमकिन प्रयास किये गए हैं फिर चाहे वो पीने के साफ पानी की व्यवस्था हो या रास्तें में बैठने के लिए बैंच व खाने के लिए कम दाम में सरकारी भोजनालय की व्यवस्था। यहां पर सरकार को अभी बहुत ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि  अब ये एक प्रसिद्व स्थल है। हांलांकि मैने देखा कि वहां यात्रियों की सुविधा के लिए रोप वे या उडन खटोले का निर्माण कार्य चल रहा था जो कोरोना के चलते आजकल बंद पडा था। 

शेष भाग पढिये अगले लेख में।

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