कर्नाटक सरकार का सराहनीय कदम बना महिलाओं के लिये बडा तौहफा | अब महिलाओं के साथ ट्रांसजेंडर्स को भी मिलेगी पीरियड्स के लिए हर माह एक छुटटी

 

जितेंद्र सिंह | अलीगढ़ 

क्या खास है पीरियड लीव बिल में

कर्नाटका सरकार ने एक अघिकारिक आदेश जारी करते हुए राज्य की सभी सरकारी गैर सरकारी संविदा पर या ठेके पर काम करने वाली 18 से 52 वर्ष की महिलाओं को एक बडी सौगात देने का एलान किया है। अब ये महिलाऐं साल में 12 यानी कि प्रत्येक माह में एक मैंन्स्ट्रल लीव या पीरियड लीव ले सकेंगी। और तो और उन्हें इसके लिये किसी मैडिकल सर्टिफिकेट या किसी अन्य प्रूफ की अवश्यक्ता नही होगी । और ना ही इस छुटटी के पैसे कटेंगे। इसके साथ ही सरकारी व प्राईवेट संस्थाओं में पढ़ने वाली छात्राओं को अटेंडेंस में 2 प्रतिशत की छूट मिलेगी। और हां इसमें ट्रांसजेंडर्स को भी शामिल किया गया है। 

पीरियड लीव बिल पर क्यों है लोगों को आपत्ती

वैसे तो हमें कर्नाटका सरकार के इस कदम की सराहना करना चाहिये  हम इस बात को भी नहीं नकार सकते कि हमारे समाज में एल जी बी टी क्यू समुदाय के लिए कोई जगह नहीं हैं और इनके होने या ना होने से किसी को कोई फर्क नहीं पडता । जितना भेदभाव हम इन के साथ करते हैं वो पहले ही क्या कम है। ये तो अच्छा है कि किसी प्रदेश की सरकार ने तो कम से कम हाशिये पर रह रहे इन लोगों के बारे में सोचा। हालांकि बहुत से बुद्धिजीवि और ट्रासजेंडर्स के अघिकारों की वकालत करने वाले सरकार कि इस पहल का विरोघ कर रहे हैं । इंटरसैक्स राईट्स एक्टिविस्ट का मानना है कि पीरियडस सिर्फ  महिलाओं को होते है यह सोच गलत है और ऐसे लोगो के खिलाफ है जो मैंस्ट्रल साईकल से गुजरते हैं । इसकी जगह मासिक घर्म वाले या रजोस्वला का प्रयोग करना उचित होगा जो सभी को शामिल करता है जिन्हें पीरियडस् होते हैं। इसके अलावा मीनोपॉज या रजोनिवृत स्थिति से गुजर रही महिलाओं के बारे में इस विघेयक में कुछ नही कहा गया है जो कि गलत है। इन्होने एक नई बहस को जन्म दे दिया है । लेकिन हमें ये भी नहीं भूलना चाहिये कि कम से कम कहीं से तो शुरुआत हो। 

हालांकि कर्नाटक पहला राज्य नही है जो एसा करने वाला है। इससे पहले बिहार व ओडिशा भी एसा कर चुके हैं। कमाल की बात है जिस राज्य को लोग सबसे पिछडा समझते थे वे सबसे ज्यादा विकासशील सोच रखता है। 

जानें पीरियड लीव बिल पर किसनें डाली हाईकोर्ट में याचिका

लेकिन सोचने की बात तो यह है कि एसी भी संस्थाऐं है जो सरकार के इस विघेयक का समर्थन करने के बजाय विरोध कर रही हैं। बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन और  कनेक्टिविटी सिस्टम्स लिमिटेड और फेसिल एयरोस्पेस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के मैनेजमेंट ने भी पिछले हफ्ते बिल के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख किया था  मंगलवार को कोर्ट ने शुरुआती दलीलें सुनने के बाद बिल पर अंतरिम रोक लगा दी थी । हालांकि कुछ घंटे बाद राज्य के एडवोकेट जनरल शशि किरण शेट्टी ने कोर्ट से इस पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया जिसके बाद कोर्ट ने अपना आदेश वापस ले लिया ।  बुधवार को जस्टिस ज्योति एम ने साफ किया कि आदेश सुनवाई के बाद ही पारित किया जाएगा ।  मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी ।  अगर सब कुठ ठीक रहा तो जल्द ही महिलाऐं पीरियड लीव का लाभ ले सकेंगीं। 

जानिये क्या होते हैं पीरियड और क्यों जरुरत है इस लीव बिल की

मैंस्ट्रल पीरियडस यानी कि मासिक घर्म महिलाओं में एक आम शारीरिक क्रिया है जिसके दौरान महिलाओं को असहनीय दर्द और कई अन्य तरह की शारीरिक समस्याओं से गुजरना पडता है। ये प्रत्येक महीने आते हैं व तीन से चार दिन तक रहते है। पीरियडस का पहला दिन सबसे ज्यादा कठिन होता है। अब महिलाऐं अपने ऑफिस में सिर्फ एक ई मेल पर सूचना देकर पीरियडस के दौरान किसी भी दिन छुटटी ले सकती है। हालांकि इस विशेष छुटटी को किसी अन्य प्रकार की छुटटी के साथ नही लिया जा सकेगा। 




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