फिल्म समीक्षा | साईको किलर की भूमिका में संघर्ष करती मिसेज़ देशपाण्डे अका माधुरी दीक्षित नेने

जितेंद्र सिंह | अलीगढ़









बॉलीवुड की डांससिंग डीवा माधुरी दीक्षित ने अपने पूरे फिल्मी करियर में पहली बार एक सीरियल किलर की भूमिका निभाई है। छह ऐपिसोडस की इस छोटी सी सीरीज़ को डायरेक्ट किया है नागेश कुकुनूर ने । जो इससे पहले 'सिटी ऑफ ड्रीम्स' ' मॉडर्न लव हैदराबाद ' और 'द हंट : दी राजीव गांधी असासिनेशन ' केस जैस वेब सीरीज़ बना चुके है जो काफी चर्चा में रहीं है। 


इस सीरीज़ में माधुरी एक बहुत ही शातिर और चालाक साईको किलर बनी है जो हैदराबाद के जेल में जी़नत नाम से सजा़ काट रही है। तभी मुम्बई में एक के बाद एक हत्याऐं होती है  जिनमें किसी कॉपी कैट किलर का हांथ होता है। और जुर्म को अंजाम देने का तरीका बीस साल पहले पूणे में हो चुके मिसेज़ देशपाण्डे केस से हूबहू मिलता है। हत्याओं में कुछ बातें आम होती है। जैसे हत्या करने का तरीका, किलर का हत्या करने के बाद मृतक के गले में रस्सी छोड देना और दहशत फैलाने के लिये मृतक की ऑंखों को खुला रखना जिसके लिए वो ग्लू का इस्तेमाल करता है। 


मुम्बई पुलिस इस केस को सुलझाने के लिये मिसेज़ देषपाण्डे की मदद लेने का प्लान बनाती है और एक स्पेशल टीम का गठन कर उन्हें बडे ही नाटकीय ढंग से जेल से निकाल कर एक खास जगह पर पुलिस की निगरानी में रखती है । जांच मे पता चलता है हत्या करने वाले ने मिसेज़ देशपाण्डे की केस फाईल्स को ढंग से स्टडी किया है। जांच के दौरान ये भी खुलासा होता है कि मसेज देशपाण्डे ही , केस की जांच कर रहे इंस्पेक्टर तेजस फडके की असल मां है। लेकिन वो कॉपी कैट किलर कौन है और वो ये मर्डर क्यों कर रहा है ये आपको फिल्म देख कर ही पता चलेगा। 


फिल्म में माधुरी के अलावा प्रियांषु चैटर्जी व सिद्धार्थ चांडेकर भी हैं जो मुख्य भूमिकाओं में है। प्रियांशू एक पुलिस ऑफिसर की भूमिका को निभाने की पुरजोर कोशिश करने में ज्यादा असरदार नही लगते। वहीं माधुरी एक मिडल एज्ड महिला के रोल को कुछ हद तक असरदार बनाने की कोशिश में औसत ही लगती है। वो इसलिये भी हो सकता है क्योकि कि हमने उन्हें हमेंशा से अलग तरह के रोल्स में देखा और पंसंद किया है। राहुल रवेल की अंजाम के बाद शायद पहली बार उन्हे पर्दे पर किसी का खून करते हुए देखा है वर्ना तो वो हमेंशा दर्शको को अपनी अदाओं से ही घायल करती आई हैं। पता नहीं नागेश कुकुनूर ने इस रोल के लिये माधुरी को ही क्यो कास्ट किया। खासकर के मर्डर करने वाले द्श्यों में वो बिल्कुल भी नहीं जमती। वैसे इंस्पेक्टर के रोल में सिद्धार्थ चांडेकर की एक्टिंग ज़बरदस्त है । साथ ही उनकी पत्नी और बाकी सर्पोटिंग एक्टर ने भी अच्छा काम किया है। 

हॉटस्टार पर रिलीज़ हुई यह सीरीज़ अपने साथ कई सवाल भी छोड जाती है। जैसे कि मिसेज देशपाण्डे ने जिन आठ हत्याओं का इकबाल किया वो किसकी थी और क्यों। शायद इन सवालों को जान बूझ कर पहेली बनाया गया हो । हो सकता है नागेश  इन्ही सवालों के जवाब देने के लिए इस सीरीज़ का सीक्वेल बना दें। बहरहाल फिल्म बाकी कि सस्पेंस थ्रिलर के मुकाबले थोडी स्लो ज़रूर है लेकिन दर्शको को बांध कर रखती है। फिल्म का सस्पेंस भी औसत दर्जे का है ऐसा कुछ हटकर नहीं है जिसे याद रखा जाऐ। लेकिन फिर भी एक बार देखी जा सकती है। 

https://www.youtube.com/watch?v=dh-Vzwftf4E 

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Comments

  1. अच्छी है। क्या आपने 'धुरंधर' की भी समीक्षा की है?

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  2. Please read the review of film Ikkis by R Raghavan featuring Dharmendra and Agastya Nanda

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  3. https://colorsofinidia.blogspot.com/2026/01/blog-post.html#more

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