कसोल - मनीकरण : जानिये कब, कहां जायें और क्या देखें
जितेंद्र सिंह
कसोल
इिज़राईली पर्यटकों के लिये मशहूर ये छोटा सा हिल स्टेशन कुल्लू के बेहद करीब है। और यही पर सिख्खों का एक पवित्र गुरूद्वारा मनिकरण साहिब भी है जहां उफनती पार्वती नदी से लगा गर्म पानी का चश्मा लोगों को आकर्शित करता है। अघिकांश लोग जो मनाली जाते हैं वे लोटते समय कसोल होकर आते हैं। मनाली रोहतांग के ज़्यादातर टूर पैकिज में ये निश्चित रूप से शामिल होता है।
कसोल में क्या देखें
पहली नजर में कसोल एक आम हिल स्टेशन जैसा ही लगता है। नदी के दोनों ओर बसा एक छोटा सा शहर । जहां तक आपकी नज़र जाऐ दूर दूर तक सिर्फ होटल कैफे और रिसोर्ट ही नज़र आयेंगे। रात भर सफर कर के यहां पहुंचे लोग थकान मिटाने के लिये नदी के किनारे चले जाते है। जहां ठण्डे ठण्डे पानी में पैर डाल कर थोडी देर बैठने में जो सुकून मिलता है उसके आगे सब कुछ फेल है। जगह जगह पर स्थानीय व्यंजन जैसे कि थुपका , सिड्डू , मैगी , मोमोज़ डफलिंग और चाय की टपरियां सजी हुई हैं।
कसोल और उसके आसपास घूमने लायक जगहें
हिमाचल की पार्वती घाटी में बसा कसोल बैकपैकर्स का स्वर्ग माना जाता है। यहां से कुछ ही दूरी पर कई खूबसूरत स्पॉट हैं जो आपके ट्रिप को यादगार बना देंगे।
1 तोष- देवदार के जंगलों और झरनों से घिरा एक शांत गाँव, आसान से मध्यम ट्रेक्स और कैफ़े कल्चर के लिए मशहूर। सर्दियों में बर्फ़ीले नज़ारे इसे पोस्टकार्ड जैसा बना देते हैं।
2 खीरगंगा ट्रेकर- पार्वती नेशनल पार्क के भीतर 12-14 किमी का लोकप्रिय ट्रेक, रास्ते में झरने और घने जंगल। शिखर पर प्राकृतिक गरम पानी के कुंड में डुबकी लेना सबसे बड़ा आकर्षण है।
3 मलाणा- अपनी अनोखी परंपराओं और अलग.थलग संस्कृति के लिए जाना जाने वाला प्राचीन गाँव। यहाँ जाते समय स्थानीय रीति- रिवाजों का सम्मान ज़रूर करें।
4 चलाल- रसोल- कसोल से नदी के किनारे. किनारे छोटे, सुंदर ट्रेल्स। शांति पाइन के पेड़ और घाटी के पैनोरमिक व्यूज़ के लिए बेहतरीन।
5 मनिकरण साहिब- कसोल से करीब 4 - 5 किमी पर स्थित गुरुद्वारा, प्राकृतिक गरम झरनों और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध।
कसोल में क्या करें
अगर आप पहाडों की खूबसूरती को करीब से महसूस करना चाहते हैं और यहां की संस्कृति के प्रति जिज्ञासा रखते हैं तो आपको एक आम सैलानी की तरह एक फिक्सड टूर प्लान लेकर नही आना चाहिये। आपको यहां समय देना होगा यहां की फिजा़ को और यहां की आबो हवा को महसूस करने के लिये। यहां पर नदी के उस पार ढेर सारे कैफे हैं जिनका एम्बिऐंस और डिजा़इन भी एस्थेटिक है। जो आपको एक अलग दुनिया में ले जाते है। वहां बैठ कर समय बिताना आपको बेहद पसंद आयेगा। ये बात अलग है कि आप वहां किस के साथ जा रहे हैं । वैसे दोस्तों के साथ भी मौज मस्ती और सैर सपाटे के लिये कसोल एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है। एक तरफ बहती नदी तो दूसरी ओर कैफे में बजता लाईव संगीत कहीं पर जैज़ तो कहीं इंडियन। आप देर शाम तक इसे ईन्जॅाय कर सकते हं। इसके साथ ही यहां बहुत सारे रिसौर्ट और रिवर साईड कैम्प बने हुऐ हैं। जो कि अस्थाई होने के बावजूद सभी जरूरी सुविघाओं से लैस है। कसोल में आकर अगर आप इन कैम्पस में नही रूके तो फिर आपने कसोल नहीं देखा।
सुबह जल्दी उठ कर पहाडों की सैर पर निकल जायें । ऐसे में अगर उगते सूरज को देख पायें तो उस से अदभुत कुछ नहीं हो सकता। आप पास के किसी गावं में टैृक कर के जाने का मौका मिले तो उसे गवाऐं नहीं। वहां जायें वहां का जीवन देखें वहां के लोगों से बात करें और वहां के पारम्परिक हिमाचली खाने का लुत्फ उठायें। रास्तें में आपको जंगली फल जैसे कि आडू और खुबानी के पेड मिलेंगें और सेब के बागान भी जो आपको मोहित कर देंगें। एसे में किसी शांत सी जगह पर किसी पेड के नीचे थोडी देर सुकुन के कुछ पल बितायें और आत्म मंथन करें। आप अपने जीवन के सारे कडवे पलों को भूल जायेंगे। और हां वहां जाकर मोबाईल का इस्तेमाल सिर्फ फोटो खींचने के लिये ही कीजिये सोशल मीडिया के लिये नहीं। अगर आप क्रिऐटिव फील्ड से जुडे हैं तो ये सुकुन आपको नए विचारों से भर देगा।
घ्यान देने योग्य कुछ जरूरी बातें
1 ये हिल स्टेशन युवाओं के बीच काफी प्रचलित है। और यहां ज्यादातर यूनिवर्सिटी व कालिजों से आये छात्र व नवविवाहित जोडे ही आते हैं। जो अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाईम बिताना चाहते हैं। और आज कल के युवाओं और टीनेजर्स को तो आप जानते ही हैं। जिन्हें किसी की परवाह नही। बहुत से जोडे तो ऐसे होते है जो घर से झूठ बोल कर यहां आते हैं। और उनका सिर्फ एक ही मकसद है मौज मस्ती करना। ऐसे में उनके किसी भी व्यवहार या आचरण से आपको दुखी होने की जरूरत नही है। ये ऐसे हिल स्टेशनों पर आम बात है। वहां के स्थानीय लोग भी क्या करें वे चाहते तो नहीं है लेकिन जब पर्यटन से उनकी रोजी़ रोटी जुडी हो तो कोई क्या ही बोलेगा।
2 जिस सुकुन की तलाश में आप यहा आ रहे हैं वो कम सम कम जून जुलाई के महीने में तो नहीं मिलेगा। इसलिये बुकिंग करने से पहले मौसम की जानकारी जरूर लें। कहीं आप ऐसे समय पर जाने का प्लान ना बना लें जब वहां भारी बारिश व भूस्खलन या बाढ़ के हालात हों।
3 आने से पहले आने टै्वल ऐजेंट से ये सुनिश्चित करें की वो आपको जहां ठहरायेगा वो मेन रोड से कितना दूर है क्योंकि पहाडों पर हर जगह जाया नही जा सकता और पार्किंग भी काफी दूरी पर होती है । जिन रोड साईड कैम्प का हमने ज्रिक्र किया उस तक पहुचने के लिये बहुत चलना होंगा और वो भी क्च्चे पक्के रास्तों और पगडंडियों से होकर। ऐसे में आपके पास यदि ज्यादा सामान होगा तो आपको लाने ले जाने में बहुत मशक्क्त करनी होगी। और पहाडों पर बहुत चलना पडता है। ये सेाच कर जायें।
4 कुल्लू से कसेाल की और जाने वाली सडक की हालत काफी खराब है । और गर्मियों के दिनों में तो यहां लेाग जाम में फंसे रहते है। इसलिये पहले सडक कार्य निर्माण की स्थिति का पता लगा लें ।
5 सर्दियों वाले मौसम में लेयर्ड कपड़े रखेंए ट्रेकिंग जूते पहनें और कचरा वापस लाना न भूलें। नेटवर्क कई जगहों पर कमजोर रहता है इसलिए ऑफ़लाइन मैप्स साथ रखें और स्थानीय गाइडलाइंस का पालन करें।
मनाली और रोहतांग के बारे में जानने के लिये यहां पर क्लिक करें :
https://www.blogger.com/u/1/blog/post/edit/3486954791246592119/1487090445716626001
To Read this blog in English:
https://qr.ae/pF4wqI
#Kasoltourism #Himachalpradesh #Himachal #Manalitourism #Rohtang #Manikaransahib #Gurudwaramanikaran #Kasol #Malana #Kheerganga #HimachalTourism #Solang #Solangvalley #






Comments
Post a Comment