मनाली जाने का सोच रहे हो तो पहले इसे पढिये वरना जाम में फंसें रह जाऐंगे
जितेंद्र सिंह
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| A Scenic view of Manali City |
मनाली हम सभी का पंसदीदा हिल स्टेशन है। और हो भी क्यों ना एक तो ये लद्दाख जाने के लिये गेटवे हैं और दूसरा रोहतांग में पूरे साल बर्फ पडी रहती है। इसलिये युगल जोडों से लेकर हनीमूनर्स तक ये हर किसी को आकर्षित करती है। वैसे यहां का मौसम और खूबसूरती भी बेमिसाल है। दिल्ली और चण्डीगढ से काफी करीब होने की वजह से यहां पूरे साल सैलानियों की भीड रहती है।
एक समय था जब दिल्ली से मनाली जाने में 15 से 16 घंटें का समय लगता था। और रास्ता भी इतना थकाउ कि जाने वाल की बस हो जाऐ। लेकिन पिछले कुछ सालों में सडकों व प्रमुख राजमार्गां के विस्तार होने के कारण अब 10 से 12 घंटों में आराम से मनाली पहुंचा जा सकता है। पहले इस रूट पर गिनी चुनी बसें ही चलती थी। आज हिमाचल पथ परिवहन की ऐसी बसों से लेकर इंटरसिटी, ज़िंग्स ,फिलिक्स, इण्डो कैनेडियन, लक्ष्मी हॉलीडेज़ जैसी तमाम प्राईवेट कम्पनियों कि वॉल्वो बसें व टैम्पो टै्वलर भी देखी जा सकती हैं। लकिन इन सभी सुविधाओं नें मनाली में पैर रखने की जगह नही छेाडी है। जहां देखो वहां सिर्फ गाडियों की भीड व जाम । मनाली आज पूरी तरह से कॉंनक्रीट के जंगल में तबदील हो चुका है। यहां हर जगह सिर्फ होटल ही नज़र आते हैं। ।
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| Manali at a Glance |
लोग यहां रिलैक्स करने के लिये आते हैं और सिर्फ जाम में फंस कर रह जाते है। इस ब्लॉग के जरिेये हम आपको बतायेंगे मनाली में जाने का सही समय व उस से जुडी सभी महत्वपूर्ण जानकारी।
मनाली जाने का सही समय
1 मई व जून के महीने में पूरे देश के स्कूल व कॉलिजों की छुट्टियां होती है। ऐसे में शिमला ,मनाली, केदारनाथ बद्रीनाथ , मां वैष्णों देवी , हरिद्वार , मसूरी , नैनीताल हर किसी की पहली पसंद होते हैं। जहां पर हर कोंई जाना चाहता है। इसलिये इन दो महीनों में भूल कर भी इन जगहों पर जानें के बारे में नां सोंचें। एक तो अत्याघिक भीड और लोकल लोगों जैसे कि होटल मालिकों टैक्सी चालकों व बस ऑपरेटरों की मनमानी जो कभी भी अपना सेवाओं के दाम बढा देते हैं। बहुत मजबूरी हो तभी इन दिनों में वहां जायें और वो भी पहले से सभी बुकिंग करवा कर । इसके विपरीत यहां आनें के लिये सबसे अनुकूल समय है सितम्बर से अक्तूबर व फरवरी से मध्य अप्रैल। एक तो इन दिनों मे भीड बहुत कम होती है और दूसरी बात की ये पहाडों का ऑफ सीजन कहा जाता है तो ऐसे में हर चीज़ के रेट कम हो जाते हैं जैसे कि होटल, कार और पब्लिक ट्रांसर्पोटर आदि। और भीड कम होने की वजह से आपको कहीं पर भी जाम नही मिलता ।
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| Hidimba Temple at Manali |
2 जुलाई और अगस्त के महीनों में पहाडों पर बारिश पडती है तो ऐसे में वहां जाना जोखिम भरा होता है। क्योंकि वहां पर पहाडों के टूटने गिरने व बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। ऐसे में अक्स लेना चाहते है तो दिसम्बर से फरवरी के बीच भी पहाडों पर जा सकते हैं। लेकिन इन दिनों में भी अक्सर भारी बर्फ बारी से बिजली आपूर्ति ठप्प हो जाती है । और जब तब सडकों से बर्फ नहीं हट जाती तब तक आप वहां फंसे रह सकते हैं ये सोच कर जायें।
3 किसी भी सप्ताहंत में यानी कि शनिवार और रविवार के दौरान भी इन हिल स्टेशन पर बहुत भीड हो जाती है। तो ऐसे में आप कोशिश करें की वीक डेज़् यानी कि सोमवार से लेकर शुकवार के बीच ही जाने का प्लान बनाऐं।
टै्वल ऐजेंसी से टूर पैकेज लें या बुकिंग स्वयं करवाऐं।
2 यदि आप अपनी कार से जा रहे हैं तो आपको सिर्फ होटल बुक करवाने की जरूरत होती है।
3 यदि आप अपनी कार से नही जा रहे हैं तो आपको पहले आने जाने की बुकिंग करवानी होगी।
कैसे जायें मनाली
1 मनाली जाने के लिये सबसे अच्छा होगा कि आप दिल्ली से किसी प्राइवेट लक्ज़री बस सर्विस से मनाली के लिये वॉल्वो बुक करवाऐं। जैसे कि ज़िंग्स या इंटरसिटी । सभी बसें शाम को 5 बजे से शुरू होती हैं और रात के 12 बजे तक आसानी से पकडी जा सकती है। वैसे तो इन प्रईवेट बसों के अपने वेटिेंग लाउंज होते हैं जहां आप पहुंच कर इनके लिये इंतजार कर सकते हैं। ये कनॉट प्लेस के राम कृष्ण आश्रम मार्ग मेंट्रो के पास ही स्थित है। अन्यथा इन बसों को आप कश्मीरी गेट , मजनू का टीला व जी टी करनाल रोड जैसे जगहों से भी पकड सकते हैं। ये अमूमन 10 से 12 घंटे लेती हैं। और हां अधिकांश प्रइवेट वॉल्वो में टॉयलेट की सुविधा दी गई है। और वैसे ये रास्ते में कई जगह रूकते भी हैं खाने के लिये। इनमें 2/2 पुशबैक सीट्स होती हैं और शानदार ऐसी।
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| A view from Rohtang Valley |
2 बसों का किराया 600 से लेकर 1500 और 2000 के बीच हो सकता है या इससे अधिक भी। टिकिट पहले बुक करने पर सस्ती मिलती हैं और लेट करवाने पर उतनी ही महंगी। और सीटों के विकल्प भी कम हो जाते हैं। चण्डीगढ़ से मनाली के लिये बसों के ज्यादा विकल्प नही है। आप वहां से अपने अनुसार टैक्सी लेकर भी आ सकते हैं। जो वॉल्वों के किराये के बराबर ही पडती है। लेकिन आरामदायक रहती है। बस का किराया सीट के अनुसार होता है। पीछे की सीटों का किराया कम होता है आगे की तुलना में। पीछे की सीटों में यात्रा करना बडा कष्टप्रद होता है। ऑफ सीजन में आप बिना टिकिट बुक कराये भी सीधे कश्मीरी गेट से वॉल्वो पकड सकते हैं।
3 यदि आपको पहाडों में यात्रा करने में परेशानी होती है तो आप देश के किसी भी कोने से चण्डीगढ़ के लिये ट्रेन पकडें और यहां से बस या टैक्सी बुक करवायें। चण्डीगढ़ से मनाली की दूरी मात्र 260 किलोमीटर है। और वहां पहुचने में सिर्फ 5 से 6 घंटे लगते हैं।
टूर पैकेज से जुडी महत्वपूर्ण बातें
1 यात्रा करने से पहले ये सुनिश्चित करें कि वे कितने दिन और रातों की है और वो आपको कैसे ले जा रहे है। मतलब कि वॉल्वों से या टैम्पो टे्वलर से। वॉल्वो की तुलना में टै्वलर काफी छोटे होते है व उनकी सीटें लम्बे सफर के लिये उपयुक्त नहीं होती। तो आप ये जरूर चेक करें कि आपके पैकेज में वॉल्वो है या नहीं । यदि आप ज्यादा हेल्दी नहीं हैं तो आप टै्वलर में जा सकते है। लेकिन फिर भी वॅल्वो बहुत आरामदायक होती है। टै्वलर की सीटें मोटे या हेल्दी लोगों के लिये नहीं बनी हैं वे उनमें में ठीक से नही बैठ पाते।
2 टूर पैकेज वाले अक्सर जब उनकी सवारियां पूरी नही हो पाती तो वे आपको बिना बताये अपको किसी दूसरे टूर ऑपरेटर के पास शिफट कर देते है। जो सिर्फ एक एडजस्टमेंट होता है। ऐसे में काफी परेशानियां हो सकती है। क्योकि दूसरे टूर वालों के लिये पहली प्राथमिकता उनके अपने ग्राहक पहले हैं।
3 ये लोग कभी भी आपको सीट नम्बर नहीं देते जिसकी वजह से पीछे बैठने को लेकर अक्सर यात्रियों के बीच में विवाद की स्थिति रहती है। इनका नियम है पहल आओ पहले पाओ। इसलिये बुक करवाते समय अपनी सीटें सुनिश्च्ति आवश्य करें। पीछे बैठने को कोइ भी राजी़ नहीं होता।
4 ये लोग कभी भी अपनी मर्जी से यात्रा कार्यकृम को घटा देते हैं या अपनी सहूलियत से इसे बदल देते हैं। जिससें तय कार्यक्म में दी गई कुछ जगहों पर आपको जाने का सौभग्य नहीं मिलता।
5 बुकिंग करते समय टूर ऑपरेटर के रिव्यूज़ अवश्य देखें और रिफण्ड व कैंसिलेशन पॉलिसी अवश्य पढें। क्यांकि किसी भी आपताकालीन स्थिति में यदि आपको टूर कैंसिल या स्थगित करना पडे तो आपको नुकसान ना उठाना पडे।
6 बुकिंग करने से पहले टै्वल ऐजेसी से होटल या कॉटैज के फोटो ज़रूर मंगवायें और उनसे सुनिश्चित करें की जैसी सुविधाऐं वो आपको बता रहें हैं वैसी ही वो आपको दें।
7 और एक आखिरी बात अपनी यात्रा पूरी करने के बाद अपने रिव्यूज़ अवष्य दें। जिससे दूसरों को मदद मिले।
टै्वल पैकेज के फायदे
1 इस तरह के टूर में आप अनजान लोगों के साथ घूमने जाते हैं जिनसे आप पहले कभी नही मिले। शुरूआत में तो कुछ लोगों को घुलने मिलने में अजीब सा लगता है फिर धीरे धीरे वे आपके अच्छे दोस्त बन जाते है। और इस तरह की यात्रा का सबसे खूबसूरत अनुभव यही होता है।
2 इस टूर पर आपको एक गाईड मिलता है जो आपको हर छोटी और ज़्ारूरी बात बताता है और आपकी मदद करता है।
3 इस से आपके पैसों के साथ साथ समय की भी बचत होती है। वरना अच्छे होटल ढूंढना या वहा पर जाके घूमने के लिये कार देखना वगैरह बडा सिरर्दद का काम हो जाता है। खासकर पीक सीजन में होटल और गाडियों के दाम बढ़ जाते हैं।
4 ज़रूरी नही है कि हर टूर पैकेज वाला आपको एक बुरा अनुभव ही दे। लेकिन हर अनुभव आपको कुछ ना कुछ सिखता ही है।
कुछ जरूरी बातें
1 अगर आप पहाडों पर जा रहे हैं तो कम सम कम सामान लेकर जाऐं। आपको लाने ले जाने में सुविघा रहेगी। क्योकि पहाडों पर आपको बहुत चलना पडता है।
2 अगर आपके साथ छोटे बच्चें हों तो उनके गर्म कपडे जरूर रख के ले जाऐं। इसके अलावा आपके पास छाता, कुछ ज़रूरी दवाईयां जैसे कि सिरर्दद बुखर उलटी आदि अच्छे जूते और एक छोटा पिटठू बैग होना चाहिये जिसमें कुछ हल्का खाने का सामान ले जा सकते है। क्योंकि पहाडों पर हर चीज महंगी मिलती है।
इस लेख को अंग्रेजी लिए यहाँ क्लिक करें :
https://indiacolorfulincredible.quora.com/Are-You-Planning-to-Visit-Manali-this-Summers
मनाली और उसके आसपास घूमने की कौन कौन सी जगह है जानने के लिये इसे पढियें।
कसोल और मनीकरण के बारे में जानने के लिये यहाँ क्लिक करें :
https://colorsofinidia.blogspot.com/2026/06/blog-post_20.html#more
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